लोहियाहेड में ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश, सीएम धामी ने रवि की टिक्की का लिया स्वाद

लोहियाहेड में ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश, सीएम धामी ने रवि की टिक्की का लिया स्वाद

लोहियाहेड में ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश, सीएम धामी ने रवि की टिक्की का लिया स्वाद

स्थानीय कारोबारियों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों का बढ़ाया उत्साह, नागरिकों से किया आत्मीय संवाद

देहरादून । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोहियाहेड में ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को व्यवहार में उतारते हुए स्थानीय व्यवसाय और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री पैदल चलते हुए आम लोगों के बीच पहुंचे और स्थानीय रूप से लोकप्रिय रवि के स्टॉल पर रुककर टिक्की का स्वाद लिया।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने रवि से बातचीत कर उनके व्यवसाय और स्वरोजगार के बारे में जानकारी ली। उन्होंने स्थानीय स्तर पर छोटे व्यवसाय के माध्यम से आजीविका अर्जित करने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्यमंत्री को अपने बीच सहज रूप से पैदल चलते देखकर स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों में खासा उत्साह नजर आया। उन्होंने स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों से भी आत्मीय संवाद किया और उनकी बात सुनी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों और छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। ‘वोकल फॉर लोकल’ केवल अभियान नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का सशक्त माध्यम है।
उन्होंने कहा कि जब लोग अपने आसपास के स्थानीय उत्पादों और सेवाओं को प्राथमिकता देते हैं, तो इसका सीधा लाभ स्थानीय कारीगरों, छोटे व्यापारियों, युवाओं और स्वरोजगार से जुड़े लोगों को मिलता है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होने के साथ ही आत्मनिर्भर समाज और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के संकल्प को भी गति मिलती है।

मुख्यमंत्री का स्थानीय लोगों के बीच इस सहज और आत्मीय अंदाज में पहुंचना क्षेत्रवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने मुख्यमंत्री की सादगी तथा छोटे कारोबारियों के प्रति उनके प्रोत्साहन की सराहना की।

मुख्यमंत्री का रवि के स्टॉल पर रुककर स्थानीय व्यंजन का स्वाद लेना और कारोबारी से संवाद करना ‘वोकल फॉर लोकल’ के संदेश को जमीन पर उतारने वाली प्रेरक पहल के रूप में देखा गया।

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